उत्तर प्रदेशराजनीति

पीलीभीत में BJP को बड़ा झटका! दो बड़े चेहरे सपा में लौटे, अखिलेश ने दिलाई सदस्यता

पीलीभीत में भाजपा को झटका लगा। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा और डॉ. रत्नेश गंगवार सपा में शामिल हुए। अखिलेश यादव ने सदस्यता दिलाई, जिससे चुनावी समीकरण बदलने की चर्चा तेज।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Pilibhit Politics: पीलीभीत की सियासत में शनिवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा और BJP नेता डॉ. रत्नेश गंगवार ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। लखनऊ स्थित सपा के प्रदेश कार्यालय में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं को सदस्यता दिलाई। इस दौरान पीलीभीत से बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी मौजूद रहे।

हेमराज वर्मा की हुई घर वापसी

हेमराज वर्मा लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। अब उन्होंने एक बार फिर सपा में वापसी की है। उनकी वापसी को भाजपा में राजनीतिक अपेक्षाओं के अनुरूप भूमिका नहीं मिलने से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्मा की सपा में वापसी के बाद पीलीभीत शहर विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह सपा के टिकट के प्रमुख दावेदार हो सकते हैं।

डॉ. रत्नेश गंगवार के आने से बीसलपुर पर नजर

वहीं, BJP नेता डॉ. रत्नेश गंगवार का सपा में शामिल होना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शनिवार सुबह वह समर्थकों के साथ सैकड़ों वाहनों के काफिले में पीलीभीत से लखनऊ पहुंचे। इसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र में डॉ. गंगवार की सक्रियता और प्रभाव को देखते हुए उनके सपा में आने से पार्टी को यहां राजनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद है। उन्हें भी आगामी चुनाव में सपा के संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है।

लोध-कुर्मी समीकरण पर टिकी नजर

दोनों नेताओं के सपा में आने के बाद पीलीभीत के सामाजिक और जातीय समीकरण भी चर्चा में हैं। हेमराज वर्मा और डॉ. रत्नेश गंगवार का लोध और कुर्मी समुदायों में प्रभाव माना जाता है। ऐसे में सपा को उम्मीद है कि दोनों नेताओं की मौजूदगी से उसके संगठन और जनाधार को मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, भाजपा के प्रभाव वाले इलाकों में यह घटनाक्रम पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों नेताओं की एंट्री ने पीलीभीत की राजनीति को जरूर गरमा दिया है।

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